'तीन साल के भाई ने पूछा- "दीदी चिठ्ठी क्या होती है?"
मैं मुस्कुरा उठी। SMS के ज़माने का बच्चा चिठ्ठी कैसे जानेगा ।
मन परेशान हो गया, कैसे बताऊँ?
चिठ्ठी। एक कागज़ का टुकड़ा । पर उसके आने पर होने वाली खुशी, माँ का उसका पढ़ कर सुनाना, पापा का बीच बीच में मुसकुराना , डािकए की आवाज़, तार आने पर वह घबराहट...
राखी पर बहनों की चिठ्ठी, नानी की चिठ्ठी पर माँ का सुबकना, बुआ की चिठ्ठी से दादी की आँखें भर आना। पापा के स्थानांतरण की खबर भी तो चिठ्ठी ही लेकर आई थी। कितने परेशान थे पापा।क्या क्या समझाऊँ?
बहुत सोचा, िफर कहा - पहले हम SMS कागज़ पर लिख कर भेजते थे, वही चिठ्ठी है।
"एरोप्लेन बना कर?"
हँस पड़ी मैं। "हाहा हाँ एरोप्लेन बना कर।"
आँखें ऐसे चमक रही थी उसकी, जिंदगी का कोई गूढ़ रहस्य समझ लिया हो जैसे।'
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