Saturday, January 4, 2014

हिन्दी - हमारी मातृभाषा

बचपन में पढ़ा था -'हिन्दी एकमात्र ऐसी भाषा है जो जैसे बोली जाती है वैसे ही लिखी भी जाती है। अंग्रेज़ी के 'k'nowledge की तरह नहीं।

बोली ही अशुद्ध हो तो िलखेंगे भी गलत ही।

आज 'बहुत' हो गया है- 'बोहोत' ।
नतीजतन भाई ने लिखा -'बोहोत अच्छा हुआ पेपर'।
पहले हंसी आई, फिर रोना। उसकी क्या गलती। ये तो आज बोलचाल की भाषा है- निहायत अशुद्ध।

'बहुत' अकेला नहीं है जिसकी सूरत बिगाड़ी गई है....' क्योंकि' बन गया है 'क्यूँकि'।
लोग 'कहने' के बदले 'केहेने' लगे हैं।
'गहना' नहीं 'गेहना' पहनते हैं। अरे 'पहनते' नहीं, 'पेहेनते' है!

और तो और, सीधे-सादे 'फल' और 'फूल' भी 'फ़ल' और 'फ़ूल' बन गए हैं।

अपनी ही भाषा की इतनी बेईज्ज़ती?
अंग्रेज़ी के pronunciation पर इतना ध्यान देते हैं, हिन्दी के उच्चारण पर क्यों नहीं?

मातृभाषा है। शुद्ध बोलिए, शुद्ध लिखिए- आपकी ही शोभा बढ़ेगी । 😊